Samantapañcaka at Kurukṣetra: Paraśurāma’s Tīrtha-Creation and Pitṛ-Rites (समन्तपञ्चक-तीर्थप्रशंसा)
ततस्ते जननी राजन्दुःखशोकसमन्विता / चितामारोपयद्भर्तू रुदती सा कलेवरम्
tataste jananī rājanduḥkhaśokasamanvitā / citāmāropayadbhartū rudatī sā kalevaram
तब, हे राजन्, दुःख और शोक से व्याकुल वह जननी रोती हुई अपने पति के शरीर को चिता पर चढ़ाने लगी।