Samantapañcaka at Kurukṣetra: Paraśurāma’s Tīrtha-Creation and Pitṛ-Rites (समन्तपञ्चक-तीर्थप्रशंसा)
काश्यपाय ददौ सर्वामृते तं शैलमुत्तमम् / आत्मनः सन्निवासार्थं तं रामः पर्यकल्पयत्
kāśyapāya dadau sarvāmṛte taṃ śailamuttamam / ātmanaḥ sannivāsārthaṃ taṃ rāmaḥ paryakalpayat
उसने उस उत्तम पर्वत को छोड़कर शेष सारी (मही) कश्यप को दे दी; और राम ने उस पर्वत को अपने निवास हेतु निश्चित किया।