Samantapañcaka at Kurukṣetra: Paraśurāma’s Tīrtha-Creation and Pitṛ-Rites (समन्तपञ्चक-तीर्थप्रशंसा)
ब्रह्माणं पूजयामास यथावद्गुरुणा सह / अलङ्कृत्य यथान्याय कन्यां रूपवतीं महीम्
brahmāṇaṃ pūjayāmāsa yathāvadguruṇā saha / alaṅkṛtya yathānyāya kanyāṃ rūpavatīṃ mahīm
उसने गुरु के साथ विधिपूर्वक ब्रह्मा की पूजा की; और नियम के अनुसार रूपवती कन्या ‘मही’ को अलंकृत किया।