Samantapañcaka at Kurukṣetra: Paraśurāma’s Tīrtha-Creation and Pitṛ-Rites (समन्तपञ्चक-तीर्थप्रशंसा)
एवं क्रमेण पृथिवीं त्रिवारं भुगुनन्दनः / परिचक्राम राजेन्द्र लोकवृत्तमनुव्रतः
evaṃ krameṇa pṛthivīṃ trivāraṃ bhugunandanaḥ / paricakrāma rājendra lokavṛttamanuvrataḥ
हे राजेन्द्र! इस प्रकार क्रम से भृगुनन्दन ने तीन बार पृथ्वी का परिक्रमण किया, लोक-रीति का अनुसरण करने वाला होकर।