Samantapañcaka at Kurukṣetra: Paraśurāma’s Tīrtha-Creation and Pitṛ-Rites (समन्तपञ्चक-तीर्थप्रशंसा)
उवास तत्र नियतः कञ्चित्कालं महामतिः / ततः संवत्सरस्यान्ते ब्राह्मणैः सहितो वशी
uvāsa tatra niyataḥ kañcitkālaṃ mahāmatiḥ / tataḥ saṃvatsarasyānte brāhmaṇaiḥ sahito vaśī
महामति वशी वहाँ नियमपूर्वक कुछ समय तक निवास करता रहा। फिर वर्ष के अंत में वह ब्राह्मणों सहित वहाँ से चला।