Bhārgava’s Resolve after His Father’s Slaying
Parashurama’s Vow against the Kshatriyas
अस्त्राग्निना पुरीं सर्वां दग्ध्वा हत्वा च शात्रवान् / प्राशयानो ऽखिलान् लोकान् साक्षात्काल इवान्तकः
astrāgninā purīṃ sarvāṃ dagdhvā hatvā ca śātravān / prāśayāno 'khilān lokān sākṣātkāla ivāntakaḥ
अस्त्रों की अग्नि से उसने पूरी नगरी जला दी और शत्रुओं का वध किया; वह साक्षात् काल-रूप अन्तक की भाँति समस्त लोकों को ग्रसने लगा।