Jamadagni-Āśrama-Ākramaṇa (Attack on Jamadagni’s Hermitage) / जमदग्न्याश्रमाक्रमणम्
सा स्वचेतसि संमूच्छ्य शोकपावकदीपिताः / दूरप्रनष्टसंज्ञेव सद्यः प्राणैर्व्ययुज्यत
sā svacetasi saṃmūcchya śokapāvakadīpitāḥ / dūrapranaṣṭasaṃjñeva sadyaḥ prāṇairvyayujyata
अपने मन में अत्यंत व्याकुल होकर, शोक की अग्नि से जलती हुई, वह तत्काल प्राणों से वियुक्त हो गई, मानो उसकी चेतना बहुत दूर चली गई हो।