Bhārgava-Stuti and Kṛṣṇa’s Vara
Devotional Hymn and Boon to the Bhargava
अथोवाच जगन्माता भवानी भववल्लभा / वत्स राम प्रसन्नाहं तुभ्यं कं प्रददे वरम् / तं प्रब्रूहि महाभाग भयं त्यक्त्वा सुदूरतः / राम उवाच जन्मान्त रसहस्रेषु येषुयेषु व्रजाम्यहम्
athovāca jaganmātā bhavānī bhavavallabhā / vatsa rāma prasannāhaṃ tubhyaṃ kaṃ pradade varam / taṃ prabrūhi mahābhāga bhayaṃ tyaktvā sudūrataḥ / rāma uvāca janmānta rasahasreṣu yeṣuyeṣu vrajāmyaham
तब जगन्माता भवानी, भव की प्रिया, बोलीं— “वत्स राम, मैं प्रसन्न हूँ; तुम्हें कौन-सा वर दूँ? हे महाभाग, भय को दूर त्यागकर कहो।” राम ने कहा— “हजारों जन्मों के अंतरों में, जिन-जिन योनियों में मैं जाता हूँ…”