Bhārgava-Stuti and Kṛṣṇa’s Vara
Devotional Hymn and Boon to the Bhargava
वसिष्ठ उवाच स्तुत्वैवं जामदग्न्यस्तु विरराम ह तत्परम् / विज्ञाताखिलतत्त्वार्थो हृष्टरोमा कृतार्थवत्
vasiṣṭha uvāca stutvaivaṃ jāmadagnyastu virarāma ha tatparam / vijñātākhilatattvārtho hṛṣṭaromā kṛtārthavat
वसिष्ठ बोले—इस प्रकार स्तुति करके जामदग्न्य (परशुराम) तत्पर होकर विराम को प्राप्त हुए। समस्त तत्त्वों के अर्थ को जानकर उनके रोम-रोम हर्षित हो उठे और वे कृतार्थ के समान हो गए।