गणेश-एकदन्त-उत्पत्तिः (Origin of Gaṇeśa’s Single Tusk) / Bhārgava–Gaṇeśa Encounter
मूर्ध्न्युपाघ्राय पस्पर्श स्वहस्तेन कपोलके / स्पृष्टमात्रे कपोले तु क्षतं पूर्त्तिमुदागतम्
mūrdhnyupāghrāya pasparśa svahastena kapolake / spṛṣṭamātre kapole tu kṣataṃ pūrttimudāgatam
उसने मस्तक को सूँघकर अपने हाथ से उसके कपोल को स्पर्श किया; कपोल के स्पर्श मात्र से ही घाव भरकर पूर्णता को प्राप्त हो गया।