गणेश-एकदन्त-उत्पत्तिः (Origin of Gaṇeśa’s Single Tusk) / Bhārgava–Gaṇeśa Encounter
शप्तः पुरा सप्तभिस्तु मुनिभिः संक्षयं गतः / जातवेदा दीपितो ऽभूद्येनासौशूर्पकर्मकः
śaptaḥ purā saptabhistu munibhiḥ saṃkṣayaṃ gataḥ / jātavedā dīpito 'bhūdyenāsauśūrpakarmakaḥ
पूर्वकाल में सात मुनियों द्वारा शापित होकर वह क्षीण हो गया; जिसके द्वारा जातवेदा (अग्नि) प्रज्वलित हुआ, वह ‘शूर्पकर्मक’ कहलाया।