गणेश-एकदन्त-उत्पत्तिः (Origin of Gaṇeśa’s Single Tusk) / Bhārgava–Gaṇeśa Encounter
मुष्णंस्तेजांसि सर्वेषां स्वरुचा ज्ञानवारिधिः / अथैनमागतं दृष्ट्वा शिवः संहृष्टमानसः
muṣṇaṃstejāṃsi sarveṣāṃ svarucā jñānavāridhiḥ / athainamāgataṃ dṛṣṭvā śivaḥ saṃhṛṣṭamānasaḥ
अपनी स्वकान्ति से सबके तेज को हर लेने वाले, ज्ञान-सागर को आते देख शिव का मन हर्ष से भर उठा।