गणेश-एकदन्त-उत्पत्तिः (Origin of Gaṇeśa’s Single Tusk) / Bhārgava–Gaṇeśa Encounter
संतो भुजिष्यातनयं सत्कुर्वन्त्यात्मपुत्रवत् / भवता तु कृतोनैव सत्कारो वचसापि हि
saṃto bhujiṣyātanayaṃ satkurvantyātmaputravat / bhavatā tu kṛtonaiva satkāro vacasāpi hi
सज्जन तो सेवक-पुत्र को भी अपने पुत्र समान सत्कार देते हैं; पर तुमने तो वचन से भी मेरा सत्कार नहीं किया।