Pushkarākṣa’s Battle with Rāma Jāmadagnya (Bhārgava) — Astras and the Fall of a Prince
लेख्येव सच्चित्रकरप्रयुक्ता सुदीनचित्तस्य विलक्ष्यते ऽग / ततः स राजा निजवीर्यवैभवं समस्तलोकाधिकतां प्रयातम्
lekhyeva saccitrakaraprayuktā sudīnacittasya vilakṣyate 'ga / tataḥ sa rājā nijavīryavaibhavaṃ samastalokādhikatāṃ prayātam
अत्यन्त दीन-चित्त उस राजा की दशा कुशल चित्रकार द्वारा बनाई हुई चित्र-रेखा के समान स्पष्ट दिखने लगी। तब उसने अपने पराक्रम-वैभव को समस्त लोकों से भी अधिक ऊँचा पहुँचा हुआ देखा।