Agastyopadeśa: Viṣṇupada-stava-sādhanā and Paraśurāma’s Darśana of Hari
यं वै प्रसन्ना असुराः सुरा नराः सकिन्नरास्तिर्यकेयोनयो ऽपि हि / गताः स्वरूपं निखलं विहाय ते देहस्त्र्यपत्यार्थममत्वमीश्वर
yaṃ vai prasannā asurāḥ surā narāḥ sakinnarāstiryakeyonayo 'pi hi / gatāḥ svarūpaṃ nikhalaṃ vihāya te dehastryapatyārthamamatvamīśvara
हे ईश्वर! जिन पर प्रसन्न होकर असुर, सुर, मनुष्य, किन्नर और तिर्यक्-योनि वाले भी अपना समस्त स्वरूप त्यागकर तेरे पास आते हैं—वे देह, स्त्री और सन्तान के हेतु ‘ममत्व’ में बँध जाते हैं।