भक्तेस्तु लक्षणं ज्ञात्वा त्रिविधाया महामते / यो यतेत नरस्तस्य सिद्धिर्भवति सत्वरम्
bhaktestu lakṣaṇaṃ jñātvā trividhāyā mahāmate / yo yateta narastasya siddhirbhavati satvaram
हे महामति! त्रिविध भक्ति के लक्षण को जानकर जो मनुष्य उसमें प्रयत्न करता है, उसकी सिद्धि शीघ्र होती है।