Trailokya-vijaya Kavacha (Śrī Kṛṣṇa-kavaca) — त्रैलोक्यविजयकवचम्
जले स्थले चान्तरिक्षे नृसिंहः पातु मां सदा / स्वप्ने जागरणे चैव पातु मां माधवः स्वयम्
jale sthale cāntarikṣe nṛsiṃhaḥ pātu māṃ sadā / svapne jāgaraṇe caiva pātu māṃ mādhavaḥ svayam
जल में, स्थल में और आकाश में नृसिंह सदा मेरी रक्षा करें। स्वप्न में और जाग्रत अवस्था में स्वयं माधव मेरी रक्षा करें।