Trailokya-vijaya Kavacha (Śrī Kṛṣṇa-kavaca) — त्रैलोक्यविजयकवचम्
रासारंभप्रियायेति स्वाहान्तो हीं ममावतु / वृन्दाप्रियाय स्वाहेति सकलाङ्गानि मे ऽवतु
rāsāraṃbhapriyāyeti svāhānto hīṃ mamāvatu / vṛndāpriyāya svāheti sakalāṅgāni me 'vatu
‘रासारम्भप्रिय’ कहकर ‘स्वाहा’ के अन्त में ‘हीं’—यह मन्त्र मेरी रक्षा करे। ‘वृन्दाप्रिय’ कहकर ‘स्वाहा’—यह मेरे समस्त अंगों की रक्षा करे।