Paraśurāma’s Vow and Jamadagni’s Teaching on Kṣamā
Forbearance
इति श्रीब्रह्माण्डे महापुराणे वायुप्रोक्ते मध्याभागे तृतीय उपोद्धातपादे भार्गवचरिते त्रिंशत्तमो ऽध्यायः // ३०// सगर उवाच ब्रह्मपुत्र महाभाग वद भार्गवचेष्टितम् / यच्चकार महावीर्य्यो राज्ञः क्रुद्धो हि कर्मणा
iti śrībrahmāṇḍe mahāpurāṇe vāyuprokte madhyābhāge tṛtīya upoddhātapāde bhārgavacarite triṃśattamo 'dhyāyaḥ // 30// sagara uvāca brahmaputra mahābhāga vada bhārgavaceṣṭitam / yaccakāra mahāvīryyo rājñaḥ kruddho hi karmaṇā
इस प्रकार श्रीब्रह्माण्ड महापुराण के वायु-प्रोक्त मध्यभाग के तृतीय उपोद्धातपाद में भार्गवचरित का त्रिंशत्तम अध्याय। सगर बोले—हे ब्रह्मपुत्र महाभाग! भार्गव का आचरण बताइए, कि उस महावीर ने राजा के कर्म से क्रुद्ध होकर क्या किया।