Reṇukā-vilāpa and the Aftermath of Jamadagni’s Slaying (अर्जुनोपाख्यान-प्रसङ्गः)
तमायान्तमभिप्रेक्ष्य रुदती सा भृशातुरा / नविभूतेव शोकेन प्रारुदद्रेणुका पुनः
tamāyāntamabhiprekṣya rudatī sā bhṛśāturā / navibhūteva śokena prārudadreṇukā punaḥ
उसे आते देखकर वह अत्यन्त व्याकुल होकर रोने लगी; शोक से मानो सुध-बुध खोकर रेणुका फिर फूट-फूटकर विलाप करने लगी।