Jamadagni, Brahmasva, and Royal Coercion (धेनुहरण-प्रसङ्गः / ब्रह्मस्व-अपरिहार्यत्वम्)
व्यथितातिकशापातैः क्रोधेन महातान्विता / आकृष्य पाशान् सुदृढान् कृत्वात्मानममोचयत्
vyathitātikaśāpātaiḥ krodhena mahātānvitā / ākṛṣya pāśān sudṛḍhān kṛtvātmānamamocayat
कोड़ों की अत्यधिक मार से व्यथित और महान क्रोध से भरकर, उसने उन मजबूत रस्सियों को खींचकर तोड़ दिया और स्वयं को मुक्त कर लिया।