Jamadagni, Brahmasva, and Royal Coercion (धेनुहरण-प्रसङ्गः / ब्रह्मस्व-अपरिहार्यत्वम्)
सपूर्वं क्रोधनो ऽत्यर्थं मातुरर्थे प्रसादितः / रामेणाभूत्ततो नित्यं शान्त एव महातपाः
sapūrvaṃ krodhano 'tyarthaṃ māturarthe prasāditaḥ / rāmeṇābhūttato nityaṃ śānta eva mahātapāḥ
वह महातपस्वी पहले अत्यंत क्रोधी था, पर माता के हेतु राम ने उसे प्रसन्न किया। तब से वह सदा शांत ही रहा॥