Jamadagni, Brahmasva, and Royal Coercion (धेनुहरण-प्रसङ्गः / ब्रह्मस्व-अपरिहार्यत्वम्)
स तथा हन्यमोनो ऽपि व्यथितःक्षमयान्वितः / न चुक्रोधाक्रोधनत्वं सतो हि परमं धनम्
sa tathā hanyamono 'pi vyathitaḥkṣamayānvitaḥ / na cukrodhākrodhanatvaṃ sato hi paramaṃ dhanam
वह इस प्रकार मारा जाता हुआ भी, पीड़ित होकर भी, क्षमा से युक्त रहा। वह क्रोधित न हुआ; क्योंकि सज्जन का परम धन अक्रोध ही है॥