Rāja-prabodhana and Prātaḥ-kṛtya
Awakening of the King and Morning Observances
जमदग्निरुवाच जीवन्नाहं तु दास्यामि वासवस्यापि दुर्मते / गुरुणा याचितं किं ते वचसा नृपतेः पुनः
jamadagniruvāca jīvannāhaṃ tu dāsyāmi vāsavasyāpi durmate / guruṇā yācitaṃ kiṃ te vacasā nṛpateḥ punaḥ
जमदग्नि बोले—हे दुर्मति! मैं जीवित रहते इन्द्र (वासव) को भी नहीं दूँगा। गुरु ने जो माँगा है, उसे छोड़कर फिर राजा के वचन से तुम्हारा क्या प्रयोजन?