Rāja-prabodhana and Prātaḥ-kṛtya
Awakening of the King and Morning Observances
ब्राह्मणो ऽयं स्वजातीयहितमेव समीक्षते / महान्ति राजकार्याणि द्विजैर्वेत्तुं न शक्यते
brāhmaṇo 'yaṃ svajātīyahitameva samīkṣate / mahānti rājakāryāṇi dvijairvettuṃ na śakyate
यह ब्राह्मण अपने जाति-बन्धुओं के हित को ही देखता है; राजकार्य के महान् विषयों को द्विजों द्वारा जान पाना कठिन है।