Rāja-prabodhana and Prātaḥ-kṛtya
Awakening of the King and Morning Observances
प्रासादा विविधाकारा धनं चादृष्टसंक्षयम् / धेनो तस्यां क्षणेनैव विलीनं पश्यतो मम
prāsādā vividhākārā dhanaṃ cādṛṣṭasaṃkṣayam / dheno tasyāṃ kṣaṇenaiva vilīnaṃ paśyato mama
विविध आकारों के प्रासाद और ऐसा धन था जिसका क्षय दिखाई न देता था; पर उस गाय में वह सब मेरे देखते-देखते क्षणभर में ही विलीन हो गया।