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Shloka 3

Rāja-prabodhana and Prātaḥ-kṛtya

Awakening of the King and Morning Observances

स्निग्धकण्ठाः सुविस्पष्टमूर्च्छनाग्रामसूचितम् / जगुर्गेयं मनोहारि तारमन्द्रलयान्वितम्

snigdhakaṇṭhāḥ suvispaṣṭamūrcchanāgrāmasūcitam / jagurgeyaṃ manohāri tāramandralayānvitam

मधुर कंठ वाले वे गायक, मूर्च्छना और ग्राम को अत्यंत स्पष्ट रूप से प्रकट करते हुए, मनोहर गीत गाने लगे, जो तार और मंद्र—दोनों लयों से युक्त था।

स्निग्धकण्ठाः(they) with mellow throats/voices
स्निग्धकण्ठाः:
कर्ता (कर्ता)
TypeAdjective
Rootस्निग्ध-कण्ठ (प्रातिपदिक)
Formकर्मधारय-समास (स्निग्धः कण्ठः येषाम्); पुल्लिङ्ग, प्रथमा (1st), बहुवचन; बहुव्रीह्यर्थे विशेषण (गायकानाम्)
सुविस्पष्टमूर्च्छनाग्रामसूचितम्clearly indicating the scales and notes
सुविस्पष्टमूर्च्छनाग्रामसूचितम्:
कर्म-विशेषण (कर्म-सम्बन्ध)
TypeAdjective
Rootसु-विस्पष्ट-मूर्च्छना-ग्राम-सूचित (कृदन्त; √सूच् धातु)
Formबहुपद-तत्पुरुष-समास; ‘सूचित’ (क्त) = indicated; नपुंसकलिङ्ग, द्वितीया (2nd), एकवचन; गेयम्-विशेषण
जगुःthey sang
जगुः:
क्रिया (आख्यात)
TypeVerb
Root√गै (धातु)
Formलिट् (Perfect), परस्मैपद; प्रथमपुरुष, बहुवचन
गेयम्a song
गेयम्:
कर्म (कर्म)
TypeNoun
Rootगेय (कृदन्त; √गै धातु)
Formनपुंसकलिङ्ग, द्वितीया (2nd), एकवचन; कर्म; ‘that which is to be sung’ (gerundive/यत्-प्रत्ययान्त)
मनोहारिmind-enchanting
मनोहारि:
कर्म-विशेषण
TypeAdjective
Rootमनो-हारिन् (प्रातिपदिक)
Formतत्पुरुष-समास (मनः हरति इति); नपुंसकलिङ्ग, द्वितीया (2nd), एकवचन; गेयम्-विशेषण
तारमन्द्रलयान्वितम्endowed with high and low tempos/tones
तारमन्द्रलयान्वितम्:
कर्म-विशेषण
TypeAdjective
Rootतार-मन्द्र-लय-अन्वित (कृदन्त; √इ धातु with अन्वि-उपसर्ग)
Formद्वन्द्व-समास (तारश्च मन्द्रश्च) + तत्पुरुष (लयेन अन्वितम्); नपुंसकलिङ्ग, द्वितीया (2nd), एकवचन; गेयम्-विशेषण