रामस्य पितृसेवा-तीर्थाटन-वृत्तान्तः
Rama’s filial service and ordered pilgrimage; setting for the Haihaya episode
कांस्यारकूटारसताम्रहेमदुर्वर्णसौधो पलदारुमृद्भिः / पृथग्विमिश्रैर्भवनैरनेकैः सद्भासितं नेत्रमनोभिरामैः
kāṃsyārakūṭārasatāmrahemadurvarṇasaudho paladārumṛdbhiḥ / pṛthagvimiśrairbhavanairanekaiḥ sadbhāsitaṃ netramanobhirāmaiḥ
काँस्य, अरकूट, रस, ताम्र, स्वर्ण और विविध वर्णों के सौध, पलाश-लकड़ी और मिट्टी से बने—अलग-अलग मिश्रित अनेक भवनों से वह स्थान सुशोभित था, जो नेत्र और मन को अत्यन्त रमणीय लगता था।