Rāma’s Stuti of Śiva (Śarva) and the Theophany of the Three‑Eyed Lord
गन्तुकामो ऽपहायाहं पन्थानं तु हिमाचले / प्रविशन्गहनं रम्यं प्रदेशालोकनाकुलम्
gantukāmo 'pahāyāhaṃ panthānaṃ tu himācale / praviśangahanaṃ ramyaṃ pradeśālokanākulam
हिमालय में जाने की इच्छा से मैं मार्ग छोड़कर एक घने, रमणीय वन-प्रदेश में घुस गया, जहाँ चारों ओर दृश्य देखकर मन व्याकुल हो उठा।