Rāma’s Stuti of Śiva (Śarva) and the Theophany of the Three‑Eyed Lord
दृष्ट्वानुकंपहृदयस्तत्परित्राणकातरः / तिष्ठतिष्ठेति तं व्याघ्रं वदन्नुच्चैरथान्वयात्
dṛṣṭvānukaṃpahṛdayastatparitrāṇakātaraḥ / tiṣṭhatiṣṭheti taṃ vyāghraṃ vadannuccairathānvayāt
उसे देखकर उसका हृदय करुणा से भर गया और उसे बचाने को व्याकुल होकर वह ऊँचे स्वर में ‘ठहर, ठहर’ कहता हुआ उस व्याघ्र की ओर दौड़ा।