Rāma’s Stuti of Śiva (Śarva) and the Theophany of the Three‑Eyed Lord
गच्छन्नथ तदासौ तु हिमाद्रिवनगह्वरे / विवेश कन्दरं रामो भाविकर्मप्रचोदितः
gacchannatha tadāsau tu himādrivanagahvare / viveśa kandaraṃ rāmo bhāvikarmapracoditaḥ
फिर चलते-चलते वह राम हिमालय के वन-गह्वर में पहुँचा और भावी कर्म से प्रेरित होकर एक गुफा में प्रवेश कर गया।