Rāma’s Inquiry into the Hidden Identity of the Radiant Stranger
Dialogue Frame
नान्यस्येदृग्भवेल्लोके प्रभावानुगतं वपुः / जात्यर्थसौष्ठवोपेता वाणी चौदार्यशालिनी
nānyasyedṛgbhavelloke prabhāvānugataṃ vapuḥ / jātyarthasauṣṭhavopetā vāṇī caudāryaśālinī
लोक में किसी और का ऐसा प्रभावयुक्त शरीर नहीं हो सकता; और न ऐसी वाणी, जो जाति-गौरव व अर्थ-सौष्ठव से युक्त और उदारता से परिपूर्ण हो।