Rāma’s Inquiry into the Hidden Identity of the Radiant Stranger
Dialogue Frame
समासाद्य स तं देशं दृष्ट्वा रामं महामुनिम् / तपस्यन्तमिदं वाक्यमुवाच विनयान्वितः
samāsādya sa taṃ deśaṃ dṛṣṭvā rāmaṃ mahāmunim / tapasyantamidaṃ vākyamuvāca vinayānvitaḥ
उस स्थान पर पहुँचकर, महोदर ने तपस्या में लगे महामुनि राम को देखा और विनयपूर्वक ये वचन कहे।