Rāma’s Inquiry into the Hidden Identity of the Radiant Stranger
Dialogue Frame
एवं क्रमेण तीर्थेषु स्नात्वा चैव वसुंधराम् / प्रदक्षिणीकृत्य शनैः शुद्धदेहो ऽभवन्नृप
evaṃ krameṇa tīrtheṣu snātvā caiva vasuṃdharām / pradakṣiṇīkṛtya śanaiḥ śuddhadeho 'bhavannṛpa
हे नृप! इस प्रकार क्रम से तीर्थों में स्नान करके और वसुंधरा की प्रदक्षिणा कर, वह धीरे-धीरे शुद्ध देह वाला हो गया।