रामस्य हिमवद्गमनम्
Rama’s Journey to Himavat
चिन्तयामास देवेशं ध्याने दृष्ट्वा जगद्गुरुम् / ध्येयावस्थि तचित्तात्मा निश्चलेद्रियदेहवान्
cintayāmāsa deveśaṃ dhyāne dṛṣṭvā jagadgurum / dhyeyāvasthi tacittātmā niścaledriyadehavān
उसने ध्यान में जगद्गुरु देवेश का दर्शन कर उनका चिन्तन किया। उसका चित्त ध्येय में स्थित हो गया और इन्द्रियाँ तथा देह निश्चल हो गए।