रामस्य हिमवद्गमनम्
Rama’s Journey to Himavat
अलङ्कृतागः सुव्यक्तं दृश्यते ऽही विलासिवत् / मृगेन्द्राहतदन्तीन्द्रकुंभस्थलपरिच्युतैः
alaṅkṛtāgaḥ suvyaktaṃ dṛśyate 'hī vilāsivat / mṛgendrāhatadantīndrakuṃbhasthalaparicyutaiḥ
वह सुसज्जित देह वाला, मानो विलासी की भाँति, स्पष्ट दिखाई देता है—सिंह से आहत गजराज के कुंभस्थल से झरे हुए (मोतियों/रत्नों) से।