रामस्य हिमवद्गमनम्
Rama’s Journey to Himavat
नानाविहगसंघुष्टैः समन्तादुपशोभितम् / समासाद्यथ शैलेन्द्रं तुषारशिशिरं गिरिम्
nānāvihagasaṃghuṣṭaiḥ samantādupaśobhitam / samāsādyatha śailendraṃ tuṣāraśiśiraṃ girim
वह स्थान नाना प्रकार के पक्षियों के कलरव से गूँजता और चारों ओर से सुशोभित था; तब वे हिम-तुषार से शीतल उस पर्वतराज के निकट पहुँचे।