रामस्य हिमवद्गमनम्
Rama’s Journey to Himavat
सहसा निपतत्सिंहनखनिर्भिन्नमस्तकैः / गजैराक्रन्दनादेन पूर्यमामं वनं क्वचित्
sahasā nipatatsiṃhanakhanirbhinnamastakaiḥ / gajairākrandanādena pūryamāmaṃ vanaṃ kvacit
कहीं सिंह के नखों से फटे मस्तक वाले हाथी सहसा गिर पड़ते, और उनके आर्तनाद से सारा वन भर उठता था।