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Shloka 50

Rāma’s Service to Parents and Departure to Visit the Paternal Grandparents

Pitāmaha-gṛha-gamana

सर्वतो वीज्यमानेन विविधेन नभस्वता / एवंविधगुणोपेतं पश्यन्नाश्रममुत्तमम्

sarvato vījyamānena vividhena nabhasvatā / evaṃvidhaguṇopetaṃ paśyannāśramamuttamam

चारों ओर से बहती विविध पवनों से शीतलित उस उत्तम आश्रम को, ऐसे गुणों से युक्त देखकर (वह आगे बढ़ा)।

सर्वतःfrom all sides
सर्वतः:
अधिकरण (स्थान/दिशा)
TypeIndeclinable
Rootसर्वतः (अव्यय)
Formअव्यय; क्रियाविशेषण (adverb)
वीज्यमानेनbeing fanned
वीज्यमानेन:
करण (Instrument/करण)
TypeAdjective
Rootवीज्यमान (कृदन्त; √वीज्/√विज् ‘to fan’ धातु, शानच्/मान)
Formनपुंसक/पुंलिङ्ग, तृतीया (3), एकवचन; कर्मणि वर्तमानकाले कृदन्त (मान); साधन-भावे
विविधेनvarious
विविधेन:
विशेषण (करण-विशेषण)
TypeAdjective
Rootविविध (प्रातिपदिक)
Formपुं/नपुंसकलिङ्ग, तृतीया (3), एकवचन
नभस्वताby the wind
नभस्वता:
करण (Instrument/करण)
TypeNoun
Rootनभस्वत् (प्रातिपदिक)
Formपुंलिङ्ग, तृतीया (3), एकवचन
एवं-विध-गुण-उपेतम्endowed with such qualities
एवं-विध-गुण-उपेतम्:
विशेषण (कर्म-विशेषण)
TypeAdjective
Rootएवं (अव्यय) + विध (प्रातिपदिक) + गुण (प्रातिपदिक) + उपेत (कृदन्त; √इ/√या with उप-; क्त)
Formनपुंसकलिङ्ग, द्वितीया (2), एकवचन; भूतकर्मणि कृदन्त (क्त) ‘युक्त/समन्वित’; समासः—तत्पुरुषः (एवंविधान् गुणान् उपेतम्)
पश्यन्seeing
पश्यन्:
कर्ता (Agent/कर्ता)
TypeVerb
Root√पश् (धातु) + शतृ (कृदन्त)
Formवर्तमानकाले कर्तरि कृदन्त (शतृ); पुंलिङ्ग, प्रथमा (1), एकवचन; मुख्यक्रियायाः सहकाल-क्रिया (while seeing)
आश्रमम्hermitage
आश्रमम्:
कर्म (Object/कर्म)
TypeNoun
Rootआश्रम (प्रातिपदिक)
Formपुंलिङ्ग, द्वितीया (2), एकवचन
उत्तमम्excellent
उत्तमम्:
विशेषण (कर्म-विशेषण)
TypeAdjective
Rootउत्तम (प्रातिपदिक)
Formपुंलिङ्ग, द्वितीया (2), एकवचन