Nakṣatra-Śrāddha (Ancestral Rites Connected with Asterisms) — नक्षत्रश्राद्धम्
परिवादात्क्रिमिर्भूत्वा तत्रैव परिवर्त्तते / योगान्परिवदेद्यस्तु ध्यानिनो मोक्षकाङ्क्षिणः
parivādātkrimirbhūtvā tatraiva parivarttate / yogānparivadedyastu dhyānino mokṣakāṅkṣiṇaḥ
निंदा के कारण वह कीड़ा बनकर वहीं भटकता रहता है; जो ध्यानस्थ, मोक्ष-कांक्षी योगियों की निंदा करता है।