Nakṣatra-Śrāddha (Ancestral Rites Connected with Asterisms) — नक्षत्रश्राद्धम्
भस्मनीव हुतं हव्यं दत्तं पौनर्भवे द्विजः / षष्टिं काणः शतं षण्ढः श्वित्री पञ्चशतान्यपि
bhasmanīva hutaṃ havyaṃ dattaṃ paunarbhave dvijaḥ / ṣaṣṭiṃ kāṇaḥ śataṃ ṣaṇḍhaḥ śvitrī pañcaśatānyapi
हे द्विज! पौनर्भव (पुनर्विवाहित) को दिया हुआ दान ऐसा है मानो भस्म में हवन किया गया हो। काना साठ, षण्ढ सौ, और श्वित्री पाँच सौ (गुणा तक) फल को नष्ट कर देता है।