Nakṣatra-Śrāddha (Ancestral Rites Connected with Asterisms) — नक्षत्रश्राद्धम्
बृहस्पतिरुवाच गयायामक्षयं श्राद्धञ्जपहोमतपांसि च / पितृक्षये हि तत्पुत्र तस्मात्तत्राक्षयं स्मृतम्
bṛhaspatiruvāca gayāyāmakṣayaṃ śrāddhañjapahomatapāṃsi ca / pitṛkṣaye hi tatputra tasmāttatrākṣayaṃ smṛtam
बृहस्पति ने कहा—हे पुत्र! गया में श्राद्ध, जप, होम और तप—ये सब अक्षय फल देने वाले हैं। क्योंकि वहाँ पितरों का क्षय (दुःख-नाश) होता है, इसलिए वह स्थान ‘अक्षय’ कहा गया है।