Śrāddha-kalpa: Amarakantaka–Tīrtha-Māhātmya and Akṣaya Pitṛ-Tarpaṇa
यत्र श्राद्धानि दत्तांनि ह्यक्षयाणि भवन्त्युत / माठरस्य वने पुण्ये सिद्धचारणसेविते
yatra śrāddhāni dattāṃni hyakṣayāṇi bhavantyuta / māṭharasya vane puṇye siddhacāraṇasevite
जहाँ श्राद्ध में दिया गया दान निश्चय ही अक्षय फल देने वाला होता है—माठर के उस पुण्य वन में, जहाँ सिद्ध और चारण सेवा करते हैं।