Śrāddha-kalpa: Amarakantaka–Tīrtha-Māhātmya and Akṣaya Pitṛ-Tarpaṇa
हेतुनिष्ठश्च पञ्चैते न तीर्थे फलभागिनः / गुरुतीर्थे परा सिद्धिस्तीर्थानां परमं पदम्
hetuniṣṭhaśca pañcaite na tīrthe phalabhāginaḥ / gurutīrthe parā siddhistīrthānāṃ paramaṃ padam
हेतु-वाद में आसक्त ये पाँच जन तीर्थ में फल के भागी नहीं होते। गुरु-तीर्थ में परम सिद्धि है; वही तीर्थों का सर्वोच्च पद है।