श्राद्धकल्पे पितृदेवपूजाक्रमः (Śrāddhakalpa: Order of Pitṛ and Deva Worship)
निर्भयं विरजस्कं च निःशोकं निर्व्यथक्लमम् / ब्राह्मं स्थानमवाप्नोति सर्वलोकपुरस्कृतम्
nirbhayaṃ virajaskaṃ ca niḥśokaṃ nirvyathaklamam / brāhmaṃ sthānamavāpnoti sarvalokapuraskṛtam
वह निर्भय, रज-रहित, शोक-रहित और पीड़ा-थकान से रहित ब्राह्म स्थान को प्राप्त करता है, जो समस्त लोकों में पूजित है।