Pitṛgaṇa-Vibhāga (Classification of the Pitṛs) and the Śrāddha–Soma Nourishment Cycle
ध्यात्वा प्रसादं ते चक्रुस्तस्यास्तदनुकंपया / अवश्यं भाविनं दृष्ट्वा ह्यर्थमूचुस्तदा तु ताम्
dhyātvā prasādaṃ te cakrustasyāstadanukaṃpayā / avaśyaṃ bhāvinaṃ dṛṣṭvā hyarthamūcustadā tu tām
उस पर करुणा करके उन्होंने अनुग्रह का निश्चय किया; होने वाले को अवश्यंभावी जानकर तब उन्होंने उसे यह बात कही।