Pitṛgaṇa-Vibhāga (Classification of the Pitṛs) and the Śrāddha–Soma Nourishment Cycle
पितॄणां हि प्रसादेन प्राप्यते स महात्मनाम् / मुक्तावैडूर्यवासांसि वाजिनागायुतानि च
pitṝṇāṃ hi prasādena prāpyate sa mahātmanām / muktāvaiḍūryavāsāṃsi vājināgāyutāni ca
पितरों की कृपा से महात्माओं को वह (फल) प्राप्त होता है—मुक्ता और वैडूर्य से युक्त वस्त्र, तथा घोड़े और हाथियों के अयुत (दस-हज़ार) समूह भी।