Pitṛgaṇa-Vibhāga (Classification of the Pitṛs) and the Śrāddha–Soma Nourishment Cycle
एति श्रीब्रह्माण्डे महापुराणे वायुप्रोक्ते मध्यभागे तृतीय उपोद्धातपादे पितृकल्पो नाम नवमो ऽध्यायः // ९// बृहस्पतिरुवाच सप्तैते जयतां श्रेष्ठाः स्वर्गे पितृगणाः स्मृताः / चत्वारो मुर्त्तिमन्तश्च त्रयस्तेषाममूर्त्तयः
eti śrībrahmāṇḍe mahāpurāṇe vāyuprokte madhyabhāge tṛtīya upoddhātapāde pitṛkalpo nāma navamo 'dhyāyaḥ // 9// bṛhaspatiruvāca saptaite jayatāṃ śreṣṭhāḥ svarge pitṛgaṇāḥ smṛtāḥ / catvāro murttimantaśca trayasteṣāmamūrttayaḥ
इस प्रकार श्रीब्रह्माण्ड महापुराण के वायुप्रोक्त मध्यभाग के तृतीय उपोद्धातपाद में ‘पितृकल्प’ नामक नवम अध्याय। बृहस्पति बोले—स्वर्ग में ये सात पितृगण विजयी और श्रेष्ठ माने गए हैं; उनमें चार मूर्तिमान हैं और तीन अमूर्त।