Vaivasvata-Manu Sarga and the Re-Manifestation of the Saptarṣis (वैवस्वतसर्गः—सप्तर्षिप्रादुर्भावः)
प्रभवश्चाव्ययश्चैव द्वादशो ऽधिपतिः स्मृतः / इत्येते भृगवो देवाः स्मृता द्वादश यज्ञियाः
prabhavaścāvyayaścaiva dvādaśo 'dhipatiḥ smṛtaḥ / ityete bhṛgavo devāḥ smṛtā dvādaśa yajñiyāḥ
प्रभव और अव्यय—ये भी थे; और बारहवें अधिपति माने गए। इस प्रकार ये यज्ञीय भृगव देव बारह कहे गए हैं।