Vaivasvata-Manu Sarga and the Re-Manifestation of the Saptarṣis (वैवस्वतसर्गः—सप्तर्षिप्रादुर्भावः)
भृगोस्तु भृगवो देवा जज्ञिरे द्वादशात्मजाः / दिव्यानुसुषुवे कन्या काव्यस्यैवानुजा प्रभोः
bhṛgostu bhṛgavo devā jajñire dvādaśātmajāḥ / divyānusuṣuve kanyā kāvyasyaivānujā prabhoḥ
भृगु से भृगव नामक बारह देव-पुत्र उत्पन्न हुए। प्रभु काव्य की अनुजा एक दिव्य कन्या भी उत्पन्न हुई।